Khwaja Abdul Khaliq Ghajdawani
Sufi Quotes 1

होश-दर-दम
हर साँस के साथ होशियार और बे-दार रहना ताकि एक साँस भी बेकार न जाए, बल्कि ख़ुदा की याद में हो।
नज़र-बर-क़दम
चलते समय नज़र को क़दमों पर रखना, इधर-उधर न देखना ताकि दिल और दिमाग़ कहीं और न जाए।
सफ़र-दर-वतन
अपने अंदरूनी ऐबों और कमज़ोरियों से निकल कर आत्मिक सुधार की ओर सफ़र करना, यानी नफ़्स से रूह की ओर तरक़्क़ी करना।
ख़ल्वत-दर-अंजुमन
लोगों के बीच रहते हुए भी दिल को ख़ुदा से जोड़े रखना, यानी ज़ाहिर में लोगों के साथ और बातिन में ख़ुदा के साथ।
याद कर्द
ख़ुदा के ज़िक्र को हमेशा याद रखना, चाहे ज़ुबान से हो या दिल से।
बाज़-गश्त
ज़िक्र के बाद दिल को इस बात पर लौटाना कि सब कुछ ख़ुदा की ही तरफ़ से है और उसी की बारगाह में रुज़ूअ है।
निगह-दाश्त
ख़यालों की हिफ़ाज़त करना, ग़ैर ज़रूरी और दुनियावी वसवसों को दिल में जगह न देना।
याद-दाश्त
हमेशा याद रखना कि ख़ुदा हर वक़्त देख रहा है और बंदा उस की निगाह में है।